Hindi Legal Guide7 min readReviewed by Tirth Inamdar

किराया अनुबंध (रेंट एग्रीमेंट) कैसे बनाएँ - ज़रूरी शर्तें, स्टांप शुल्क और पंजीकरण

How to Make a Rent Agreement in India (Clauses, Stamp Duty & Registration)

Tirth Inamdar, founder of Inamdar Legal

Tirth Inamdar

Founder · Inamdar Legal

Founder-reviewed legal guidanceSurat · India · Global clients

Turant jawab · Quick answer

किराया अनुबंध (रेंट एग्रीमेंट) में किराया, अवधि, जमा, रखरखाव, नोटिस, उपयोग और समाप्ति की शर्तें साफ़ लिखें। केंद्रीय कानून के अनुसार साल-दर-साल पट्टा, एक वर्ष से अधिक अवधि का पट्टा, या वार्षिक किराया सुरक्षित करने वाला पट्टा पंजीकृत दस्तावेज़ से बनाया जाता है; इसे केवल '12 महीने या अधिक' कहना अधूरा है। दो गवाह हर पट्टे की सार्वदेशिक वैधता-शर्त नहीं हैं और स्थानीय पंजीकरण प्रक्रिया अलग हो सकती है। 11 महीने का प्रारूप पूरे भारत का कोई कानूनी 'लूपहोल' नहीं है; राज्य के स्टांप, पंजीकरण और लीव-एंड-लाइसेंस नियम अलग से जाँचें।

किराया अनुबंध, जिसे आम तौर पर रेंट एग्रीमेंट कहा जाता है, मकान मालिक और किरायेदार के बीच का एक लिखित समझौता है जो दोनों के अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ तय करता है। एक साफ़-सुथरा और सही ढंग से बना अनुबंध आगे चलकर होने वाले बहुत-से झगड़ों से बचा लेता है। इस गाइड में हम आसान हिंदी में समझेंगे कि किराया अनुबंध में कौन-सी शर्तें ज़रूरी हैं, स्टांप शुल्क और पंजीकरण कैसे काम करते हैं, और 11 महीने वाले अनुबंध का असली कारण क्या है। इस लेख में “रेंट एग्रीमेंट कैसे बनाएँ” का व्यावहारिक और कानूनी उत्तर दिया गया है।

Ek nazar mein · At a glance

  • 01किराया अनुबंध लिखित रखना बेहतर; स्टांप और पंजीकरण राज्य/अवधि/दस्तावेज़ के अनुसार
  • 02किराया, अवधि, जमा राशि, नोटिस अवधि और रखरखाव साफ़ लिखें
  • 03पक्षों के हस्ताक्षर आवश्यक; गवाह/पहचान प्रक्रिया स्थानीय नियम पर निर्भर
  • 04साल-दर-साल, एक वर्ष से अधिक अवधि या वार्षिक किराया सुरक्षित करने वाले पट्टे का पंजीकरण
  • 05स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क हर राज्य में अलग

किराया अनुबंध में कौन-सी शर्तें ज़रूरी हैं?

एक अच्छा किराया अनुबंध सिर्फ़ किराए की रकम तक सीमित नहीं होता। इसमें वे सारी बातें साफ़ लिखी होनी चाहिए जिन पर आगे चलकर मतभेद हो सकता है। नीचे दी गई शर्तें हर अनुबंध में होनी चाहिए।

  • मासिक किराया, भुगतान की तारीख़ और सालाना बढ़ोतरी
  • सुरक्षा जमा की राशि और उसे लौटाने की शर्तें
  • अनुबंध की अवधि और लॉक-इन अवधि
  • नोटिस अवधि (अनुबंध ख़त्म करने के लिए)
  • रखरखाव, बिजली-पानी के बिल और मरम्मत की ज़िम्मेदारी
  • फ़र्नीचर और सामान की सूची (inventory)

11 महीने का अनुबंध - असली कारण और एक आम ग़लतफ़हमी

11 महीने का प्रारूप एक व्यावहारिक चलन है, पूरे भारत का पंजीकरण-विरोधी 'लूपहोल' नहीं। धारा 107 की वैधानिक भाषा साल-दर-साल पट्टा, एक वर्ष से अधिक अवधि, या वार्षिक किराया सुरक्षित करने वाले पट्टे पर केंद्रित है; राज्य कानून leave-and-license या अन्य दस्तावेज़ों को अलग से नियंत्रित कर सकते हैं।

अनिवार्य रूप से पंजीकृत होने वाला पट्टा अपंजीकृत रहे तो वह मुख्य पट्टा-शर्तों को सिद्ध करने में सीमित हो सकता है, पर धारा 49 के proviso के तहत collateral purpose के लिए उपयोग और तथ्यों के अनुसार month-to-month tenancy जैसे सीमित परिणाम संभव हैं। इसे 'पूरी तरह बेकार' या हमेशा एक जैसा परिणाम न कहें।

  • वैधानिक सीमा: year-to-year, term exceeding one year, या yearly rent
  • 11 महीने = चलन; राज्य के stamp/registration/licence नियम अलग जाँचें
  • अपंजीकृत 1 साल+ पट्टा अदालत में शर्तें साबित करने में अस्वीकार्य

स्टांप शुल्क और पंजीकरण - हर राज्य में अलग

स्टांप शुल्क राज्य का विषय है, इसलिए महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और बाक़ी राज्यों में इसकी दरें और नियम अलग-अलग हैं। कुछ राज्यों (जैसे महाराष्ट्र) में लीव एंड लाइसेंस अनुबंध का पंजीकरण भी ज़रूरी होता है। इसलिए किसी 'पूरे भारत के लिए एक' आँकड़े पर भरोसा न करें; अपने राज्य की मौजूदा दर और नियम ज़रूर पुष्टि कर लें।

  • स्टांप शुल्क राज्य-दर-राज्य अलग
  • कुछ राज्यों में लीव एंड लाइसेंस का पंजीकरण भी अनिवार्य
  • अपने राज्य की मौजूदा दर पुष्टि करें

हस्ताक्षर से पहले की जाँच-सूची

हस्ताक्षर करने से पहले यह जाँच-सूची एक बार ज़रूर देख लें - यह छोटी-सी आदत आगे के बड़े झगड़ों से बचाती है। हर बिंदु अनुबंध में साफ़ लिखा होना चाहिए।

  • दोनों पक्षों के पहचान-पत्र और पते
  • सुरक्षा जमा की राशि और वापसी की शर्तें
  • फ़र्नीचर/सामान की हालत की सूची
  • लॉक-इन अवधि और नोटिस अवधि
  • रखरखाव और बिल किसके ज़िम्मे
  • किराया, देय तारीख़ और सालाना बढ़ोतरी

किराया अनुबंध और लीव एंड लाइसेंस में अंतर

लोग अक्सर 'रेंट एग्रीमेंट' और 'लीव एंड लाइसेंस' को एक ही समझ लेते हैं, पर इनका कानूनी असर अलग होता है। किराया/पट्टा संपत्ति में हित और कब्ज़ा देता है, जबकि लीव एंड लाइसेंस सिर्फ़ इस्तेमाल की अनुमति देता है। यह अंतर बेदखली और किरायेदार की सुरक्षा पर बड़ा असर डालता है। इसकी विस्तृत जानकारी हमने एक अलग लेख में दी है (नीचे संबंधित लेख देखें)।

  • किराया/पट्टा: हित और कब्ज़ा देता है
  • लीव एंड लाइसेंस: सिर्फ़ इस्तेमाल की अनुमति
  • बेदखली और सुरक्षा दोनों पर अलग असर

पंजीकरण की प्रक्रिया और ज़रूरी दस्तावेज़

पंजीकरण की ज़रूरत होने पर स्थानीय उप-पंजीयक प्रक्रिया का पालन करें। पक्ष स्वयं, अधिकृत प्रतिनिधि या वैध POA के माध्यम से उपस्थित हो सकते हैं; पहचानकर्ता/गवाहों की संख्या और दस्तावेज़ राज्य पोर्टल व कार्यालय नियमों पर निर्भर हैं।

आम तौर पर ज़रूरी दस्तावेज़ हैं - मकान मालिक और किरायेदार के पहचान/पते के प्रमाण, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़, पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो, और गवाहों के पहचान-पत्र। प्रक्रिया पूरी होने पर पंजीकृत प्रति मिल जाती है।

  • स्थानीय नियम के अनुसार पक्ष/प्रतिनिधि, पहचान और गवाह प्रक्रिया
  • पहचान/पते के प्रमाण और फ़ोटो ज़रूरी
  • स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क राज्य के अनुसार

ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट और ई-स्टांपिंग

आजकल कई राज्यों में रेंट एग्रीमेंट ऑनलाइन और ई-स्टांपिंग के ज़रिए भी बनाया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया तेज़ और पारदर्शी हो जाती है। फिर भी, सुविधा के बावजूद अनुबंध की शर्तें ध्यान से पढ़ना और सही ढंग से स्टांप/पंजीकरण कराना उतना ही ज़रूरी है।

ऑनलाइन बनाते समय भी यह पुष्टि करें कि अनुबंध आपके राज्य के नियमों के अनुसार वैध है और उसमें सभी ज़रूरी शर्तें शामिल हैं।

  • कई राज्यों में ऑनलाइन/ई-स्टांपिंग उपलब्ध
  • प्रक्रिया तेज़, पर शर्तें ध्यान से पढ़ें
  • राज्य के नियमों के अनुसार वैधता की पुष्टि करें

किराया अनुबंध और लीव एंड लाइसेंस - विस्तार से अंतर

किराया/पट्टा अनुबंध संपत्ति में हित और कब्ज़ा देता है, जिससे किरायेदार को (राज्य कानून के अनुसार) रेंट कंट्रोल की सुरक्षा मिल सकती है और बेदखली मुश्किल होती है। इसके विपरीत, लीव एंड लाइसेंस सिर्फ़ संपत्ति इस्तेमाल करने की निजी अनुमति देता है, इसमें कोई हित अंतरित नहीं होता और इसे आम तौर पर ख़त्म करना आसान होता है। यही कारण है कि मकान मालिक अक्सर लीव एंड लाइसेंस पसंद करते हैं। पर ध्यान रहे - किसी दस्तावेज़ का असली कानूनी रूप उसके नाम से नहीं, बल्कि उसकी शर्तों और असल इरादे से तय होता है।

  • पट्टा: हित + कब्ज़ा; रेंट कंट्रोल सुरक्षा संभव
  • लीव एंड लाइसेंस: सिर्फ़ इस्तेमाल की अनुमति; ख़त्म करना आसान
  • नाम नहीं, शर्तें और इरादा असली रूप तय करते हैं

किराया न मिलने या विवाद होने पर मकान मालिक क्या करे?

अगर किरायेदार किराया नहीं दे रहा या अनुबंध की शर्तें तोड़ रहा है, तो जल्दबाज़ी में ख़ुद कोई कार्रवाई न करें। सही क्रम है - पहले लिखित सूचना/नोटिस देकर बकाया और शर्तों की याद दिलाएं, फिर भी समाधान न हो तो कानूनी नोटिस भेजें, और ज़रूरत पड़ने पर वैध आधार पर बेदखली/वसूली की कानूनी प्रक्रिया अपनाएँ।

इस पूरे दौरान भुगतान, संदेश और नोटिस का रिकॉर्ड संभालकर रखें, क्योंकि यही आगे आपके दावे को मज़बूत बनाते हैं।

  • पहले लिखित सूचना, फिर कानूनी नोटिस
  • वैध आधार पर ही बेदखली/वसूली की प्रक्रिया
  • भुगतान, संदेश और नोटिस का रिकॉर्ड रखें

Mukhya baatein

Key takeaways

  • लिखित अनुबंध में किराया, अवधि, जमा, रखरखाव, उपयोग, नोटिस और समाप्ति स्पष्ट रखें।
  • किराया, अवधि, जमा, नोटिस अवधि और रखरखाव साफ़-साफ़ लिखें।
  • पंजीकरण की वैधानिक कसौटी को केवल '12 महीने+' न कहें; राज्य और दस्तावेज़ का स्वरूप जाँचें।
  • स्टांप शुल्क हर राज्य में अलग - अपने राज्य का नियम जाँचें।
  • लंबी अवधि का अपंजीकृत पट्टा अदालत में शर्तें साबित करने में कमज़ोर पड़ता है।

Direct counsel

Legal help chahiye?

Inamdar Legal Surat se India-wide documentation, property, civil aur business matters mein practical support deta hai.

WhatsApp par baat karein

Disclaimer

ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। केंद्रीय कानून के साथ राज्य के स्टांप, पंजीकरण, किराया, प्रक्रिया और स्थानीय नियम अलग हो सकते हैं। अंतिम कानूनी/तथ्य समीक्षा: 1 जुलाई 2026। प्रकाशन से पहले संबंधित राज्य और वर्तमान अधिसूचना की दोबारा जाँच करें। कानूनी समीक्षा के लिए नामित अधिवक्ता का नाम/बार विवरण CMS में जोड़ें। आधिकारिक स्रोत: https://www.indiacode.nic.in/show-data?actid=AC_CEN_3_20_00042_188204_1523272233671&orderno=115 | https://www.indiacode.nic.in/show-data?actid=AC_CEN_18_43_00004_190816_1523340837338&orderno=18। संपर्क: support@inamdarlegal.com | WhatsApp +91 9106469665।

Aksar puche jane wale sawal

FAQ

क्या 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट कानूनी रूप से मान्य है?+

11 महीने का अनुबंध सामान्यतः इस्तेमाल होता है, पर उसकी stamping, registration और enforceability राज्य, दस्तावेज़ की प्रकृति और स्थानीय कानून पर निर्भर है।

रेंट एग्रीमेंट का पंजीकरण कब ज़रूरी है?+

सामान्यतः year-to-year, एक वर्ष से अधिक अवधि या वार्षिक किराया सुरक्षित करने वाला पट्टा पंजीकृत लिखत से बनता है; स्थानीय राज्य नियम भी जाँचें।

स्टांप शुल्क कितना लगता है?+

यह हर राज्य में अलग होता है; अपने राज्य के नियम और मौजूदा दर ज़रूर जाँचें।

सुरक्षा जमा (deposit) पर क्या नियम है?+

राशि और वापसी की शर्तें अनुबंध और राज्य के कानून पर निर्भर करती हैं - इन्हें लिखित में तय करें।