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Hindi Guides8 MIN READReviewed by Tirth Inamdar

चेक बाउंस होने पर कानूनी नोटिस कैसे भेजें - धारा 138 की पूरी गाइड

How to Send a Cheque Bounce Notice in India (Section 138 NI Act)

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Turant Jawab · Quick Answer

बैंक से चेक रिटर्न मेमो की जानकारी मिलने के 30 दिन के भीतर धारा 138 का लिखित माँग नोटिस भेजें और नोटिस में चेक की पूरी राशि स्पष्ट रूप से माँगें; ब्याज व खर्च अलग मद के रूप में लिखे जा सकते हैं। नोटिस मिलने के 15 दिन में भुगतान न हो तो शिकायत का अधिकार बनता है और सामान्यतः एक महीने के भीतर शिकायत दायर की जाती है; धारा 142(ब) के तहत पर्याप्त कारण होने पर देरी माफ़ की जा सकती है। क्षेत्राधिकार धारा 142(2) के अनुसार तय होता है, और सही पते, डाक ट्रैकिंग, वापसी लिफ़ाफ़े या इनकार जैसी सेवा-संबंधी सामग्री सुरक्षित रखनी चाहिए।

किसी ने आपको भुगतान के लिए चेक दिया और बैंक ने 'अपर्याप्त धनराशि' (insufficient funds) लिखकर वह चेक लौटा दिया - यह स्थिति भारत में बहुत आम है। घबराने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि कानून आपको एक साफ़ रास्ता देता है। परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act), 1881 की धारा 138 ऐसे मामलों के लिए एक आपराधिक उपाय देती है। बस शर्त यह है कि प्रक्रिया और समय-सीमा बिलकुल सही होनी चाहिए। इस गाइड में हम आसान हिंदी में कदम-दर-कदम समझेंगे कि चेक बाउंस होने पर कानूनी नोटिस कैसे भेजें और उसके बाद क्या करें। इस लेख में “चेक बाउंस नोटिस कैसे भेजें” का व्यावहारिक और कानूनी उत्तर दिया गया है।

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Ek Nazar Mein · At a Glance

  • चेक की वैधता: जारी होने की तारीख से 3 महीने
  • नोटिस भेजने की समय-सीमा: रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन के भीतर
  • भुगतान का समय: चेक देने वाले को नोटिस मिलने से 15 दिन
  • शिकायत दर्ज करना: मुकदमे का अधिकार बनने (16वें दिन) से 1 महीने के भीतर
  • संभावित सज़ा: 2 साल तक की जेल, या चेक राशि का दोगुना तक जुर्माना, या दोनों (धारा 138)

चेक बाउंस का मतलब क्या होता है?

जब आप किसी का दिया हुआ चेक अपने बैंक में जमा करते हैं और वह 'अपर्याप्त धनराशि' या 'व्यवस्था से अधिक राशि' जैसे किसी कारण से वापस आ जाता है, तो उसे चेक का अनादरण या आम भाषा में चेक बाउंस कहते हैं। ऐसी स्थिति में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 एक आपराधिक उपाय देती है।

ध्यान रखें - यह प्रावधान इसी अधिनियम का हिस्सा है, भारतीय दंड संहिता या नई भारतीय न्याय संहिता का नहीं, और आज भी पहले की तरह ही लागू है। इसलिए चेक बाउंस के नियम बदले नहीं हैं।

  • अपर्याप्त धनराशि - खाते में पैसा कम होना
  • खाता बंद होना या हस्ताक्षर का मेल न खाना जैसे कारण भी कुछ हालात में शामिल
  • चेक किसी कानूनी रूप से वसूली योग्य देनदारी के लिए दिया गया होना ज़रूरी

क्या हर बाउंस चेक पर धारा 138 लागू होती है?

नहीं। धारा 138 तभी लागू होती है जब चेक किसी 'कानूनी रूप से वसूली योग्य ऋण या देनदारी' के लिए दिया गया हो और सारी कानूनी शर्तें (सही नोटिस और समय-सीमा) पूरी हों। सिर्फ़ चेक का लौट आना अपने आप में आपराधिक ज़िम्मेदारी नहीं बना देता।

अनादरण के अलग-अलग कारण हो सकते हैं - 'अपर्याप्त धनराशि' इसका सबसे आम रूप है, पर अदालतों ने माना है कि 'खाता बंद', 'भुगतान रोक दिया गया' या 'हस्ताक्षर मेल नहीं खाते' जैसे कारण भी धारा 138 के दायरे में आ सकते हैं, यदि यह भुगतान रोकने के इरादे से किया गया हो। एक अहम बात यह भी है कि सुरक्षा के तौर पर दिया गया चेक भी, अगर पेश करते समय कोई वसूली योग्य देनदारी मौजूद थी, तो धारा 138 के दायरे में आ सकता है (श्रीपति सिंह बनाम झारखंड राज्य, 2021)। हर मामले के तथ्य अलग होते हैं, इसलिए वकील से पुष्टि करना बेहतर है।

  • धारा 138 के लिए कानूनी रूप से वसूली योग्य देनदारी ज़रूरी
  • खाता बंद / भुगतान रोकना / हस्ताक्षर मेल न खाना भी कुछ हालात में शामिल
  • सुरक्षा चेक भी 138 के दायरे में आ सकता है यदि देनदारी मौजूद हो

चेक बाउंस नोटिस भेजने की प्रक्रिया और समय-सीमा

धारा 138 का मामला सीधे अदालत में नहीं जाता - पहले एक लिखित कानूनी माँग नोटिस भेजना अनिवार्य है। यह नोटिस चेक देने वाले को, बैंक से रिटर्न मेमो की जानकारी मिलने के 30 दिन के भीतर भेजना होता है। सबसे सुरक्षित तरीका है रजिस्टर्ड डाक (पावती सहित) या स्पीड पोस्ट, ताकि आपके पास 'सेवा का प्रमाण' रहे।

अगर नोटिस सही पते पर भेजा गया हो और डाक रिकॉर्ड में 'इनकार' या समान टिप्पणी आए, तो अदालत तथ्यों के आधार पर deemed service मान सकती है; यह स्वतः और हर मामले में लागू नियम नहीं है। सही पता, ट्रैकिंग, पावती, लौटे लिफ़ाफ़े और अन्य सेवा-प्रमाण सुरक्षित रखें।

  • चेक वापस आना → 30 दिन के भीतर माँग नोटिस भेजें
  • नोटिस मिलने से 15 दिन का भुगतान समय दें
  • रजिस्टर्ड डाक/स्पीड पोस्ट की रसीद और रिटर्न मेमो संभालकर रखें

नोटिस में क्या-क्या ज़रूर होना चाहिए?

एक मज़बूत नोटिस असल में आपकी आगे की अदालती शिकायत का सारांश जैसा होता है - साफ़, तारीख़ों सहित और ज़रूरी दस्तावेज़ों के ब्योरे के साथ। ग़लत या बदली हुई राशि लिखने से नोटिस ख़राब हो सकता है। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि माँग नोटिस में चेक की ठीक उतनी ही राशि माँगी जानी चाहिए - उससे ज़्यादा या कम लिखने पर नोटिस दोषपूर्ण हो सकता है। ब्याज या खर्च अलग से माँगे जा सकते हैं, पर तभी जब चेक की सही राशि साफ़ तौर पर लिखी हो।

  • चेक देने वाले और पाने वाले के पूरे नाम और पते
  • चेक नंबर, राशि, तारीख़ और बैंक का नाम
  • अनादरण की तारीख़ और बैंक के मेमो में लिखा कारण
  • भुगतान के लिए स्पष्ट रूप से 15 दिन की मोहलत

नोटिस के बाद क्या होता है - शिकायत कैसे दर्ज करें?

15 दिन में भुगतान न होने पर cause of action बनता है। शिकायत धारा 142(2) के क्षेत्राधिकार नियम के अनुसार संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने दायर होती है-आम तौर पर यह इस बात पर निर्भर करता है कि चेक खाते के माध्यम से जमा हुआ या सीधे भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया। चेक, रिटर्न मेमो, नोटिस, सेवा-प्रमाण और देनदारी के दस्तावेज़ साथ लगाएँ।

शिकायत सामान्यतः cause of action बनने से एक महीने के भीतर दायर की जाती है, पर धारा 142(ब) पर्याप्त कारण दिखने पर अदालत को देरी माफ़ करने की शक्ति देती है। इसलिए समय-सीमा न चूकें, फिर भी देरी को हर हालत में अपरिवर्तनीय न लिखें।

  • 15 दिन के बाद cause of action → सामान्यतः 1 महीने में शिकायत; पर्याप्त कारण पर delay condonation संभव
  • चेक, मेमो, नोटिस की प्रति और डाक रसीदें साथ लगाएं
  • समय-सीमा चूकने पर मामला कमज़ोर हो सकता है

आम गलतियाँ जिनसे चेक बाउंस मामला कमज़ोर होता है

बहुत से लोग छोटी-छोटी तकनीकी गलतियों की वजह से मज़बूत मामला हार जाते हैं। इन आम गलतियों से बचें ताकि आपका नोटिस और शिकायत कानूनी रूप से ठोस रहें।

  • ग़लत या पुराने पते पर नोटिस भेजना
  • 30 दिन की समय-सीमा निकल जाने देना (देर से नोटिस)
  • रिटर्न मेमो खो देना - सबूत ग़ायब
  • सिर्फ़ फ़ोन या मैसेज पर भरोसा, औपचारिक रजिस्टर्ड नोटिस नहीं
  • नोटिस में चेक की सही राशि न लिखना

चेक बाउंस में ब्याज, मुआवज़ा और अंतरिम राहत

नोटिस में वैधानिक माँग के रूप में चेक की पूरी राशि साफ़ लिखें। ब्याज और उचित खर्च अलग से माँगे जा सकते हैं, लेकिन वे चेक राशि की स्पष्ट माँग को अस्पष्ट नहीं करने चाहिए। धारा 143A के तहत अदालत कुछ परिस्थितियों में 20% तक अंतरिम मुआवज़े का आदेश दे सकती है; यह स्वचालित अधिकार नहीं है।

दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील में धारा 148 के तहत अपीलीय अदालत कम-से-कम 20% जमा करने का आदेश दे सकती है। यह भी न्यायालय के आदेश पर निर्भर उपाय है, हर अपील में स्वतः लगने वाला भुगतान नहीं।

  • चेक राशि के साथ ब्याज और खर्च भी माँगे जा सकते हैं
  • धारा 143A: न्यायालय के विवेक/आदेश पर 20% तक अंतरिम मुआवज़ा
  • धारा 148: अपील में न्यायालय के आदेश पर न्यूनतम 20% जमा संभव

समझौता (Compounding) - मामला बीच में सुलझाना

धारा 138 का अपराध 'समझौता योग्य' (compoundable) है (धारा 147)। इसका मतलब है कि दोनों पक्ष मुकदमे के किसी भी चरण में आपस में समझौता कर सकते हैं - अक्सर तब, जब चेक देने वाला बकाया राशि चुका देता है। अदालतें भी जल्दी और आपसी समाधान को प्रोत्साहित करती हैं।

इसलिए अगर सामने वाला भुगतान करने को तैयार हो जाए, तो लिखित समझौते के साथ मामला निपटाया जा सकता है। यह दोनों पक्षों का समय और पैसा बचाता है।

  • धारा 138 समझौता योग्य अपराध है (धारा 147)
  • मुकदमे के किसी भी चरण में समझौता संभव
  • भुगतान पर लिखित समझौते से मामला निपट सकता है

Mukhya Baatein · Key Takeaways

  • चेक बाउंस का मामला सीधे अदालत नहीं, पहले लिखित माँग नोटिस से शुरू होता है।
  • 30 दिन में नोटिस, 15 दिन का भुगतान अवसर, फिर सामान्यतः 1 महीने में शिकायत; पर्याप्त कारण पर अदालत देरी माफ़ कर सकती है।
  • चेक किसी वसूली योग्य देनदारी के लिए होना चाहिए - हर बाउंस अपराध नहीं।
  • सही पता, ट्रैकिंग, पावती/लौटा लिफ़ाफ़ा और रिटर्न मेमो महत्वपूर्ण सेवा व बैंकिंग प्रमाण हैं।
  • नोटिस और शिकायत वकील से तैयार करवाना सुरक्षित रहता है।

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Aksar Puche Jane Wale Sawal · FAQ

चेक बाउंस होने पर सबसे पहले क्या करें?

बैंक से चेक रिटर्न मेमो लें और 30 दिन के भीतर चेक देने वाले को धारा 138 के तहत लिखित माँग नोटिस भेजें।

चेक बाउंस नोटिस कितने दिन में भेजना होता है?

बैंक से रिटर्न मेमो की जानकारी मिलने के 30 दिन के भीतर।

क्या चेक बाउंस में जेल हो सकती है?

हाँ, धारा 138 के तहत 2 साल तक की जेल, या चेक राशि का दोगुना तक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

क्या सुरक्षा के लिए दिया गया चेक भी धारा 138 में आता है?

अगर पेश करते समय कोई वसूली योग्य देनदारी मौजूद थी, तो हाँ - यह 138 के दायरे में आ सकता है।

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Disclaimer: ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। केंद्रीय कानून के साथ राज्य के स्टांप, पंजीकरण, किराया, प्रक्रिया और स्थानीय नियम अलग हो सकते हैं। अंतिम कानूनी/तथ्य समीक्षा: 1 जुलाई 2026। प्रकाशन से पहले संबंधित राज्य और वर्तमान अधिसूचना की दोबारा जाँच करें। कानूनी समीक्षा के लिए नामित अधिवक्ता का नाम/बार विवरण CMS में जोड़ें। आधिकारिक स्रोत: https://www.indiacode.nic.in/show-data?actid=AC_CEN_2_33_00042_00042_1523271998701&orderno=143&sectionId=45718&sectionno=138 | https://www.indiacode.nic.in/show-data?actid=AC_CEN_2_33_00042_00042_1523271998701&orderno=147। संपर्क: support@inamdarlegal.com | WhatsApp +91 9106469665।