Turant jawab · Quick answer
सही माँग नोटिस रास्ते के अनुसार बदलता है। MSMED संरक्षण केवल पात्र micro या small supplier को मिलता है; 45 दिन की अधिकतम अवधि statutory acceptance/deemed acceptance ढाँचे में चलती है। IBC में केवल 'undisputed' कहना पर्याप्त नहीं-₹1 करोड़ की वर्तमान सीमा, operational debt, default और कोई pre-existing dispute न होना जैसी शर्तें देखी जाती हैं। सरकार के विरुद्ध धारा 80 CPC सामान्यतः दो महीने का नोटिस माँगती है, पर तत्काल राहत में धारा 80(2) का अपवाद हो सकता है।
जब किसी से आपका पैसा या कोई दायित्व बकाया हो और बार-बार कहने पर भी भुगतान न हो, तो अगला औपचारिक कदम माँग नोटिस (demand notice) होता है। यह एक लिखित सूचना है जो आपके दावे को दर्ज करती है और सामने वाले को भुगतान का अंतिम मौक़ा देती है। इस गाइड में हम आसान हिंदी में समझेंगे कि माँग नोटिस कितने तरह के होते हैं, कब और कैसे भेजे जाते हैं, और किस स्थिति में कौन-सा नोटिस सही रहता है। इस लेख में “माँग नोटिस कैसे भेजें” का व्यावहारिक और कानूनी उत्तर दिया गया है।
Ek nazar mein · At a glance
- 01माँग नोटिस = बकाया भुगतान/दायित्व की औपचारिक मांग
- 02चेक बाउंस: धारा 138 नोटिस
- 03eligible micro/small supplier: MSMED sections 15-16, acceptance rules के साथ
- 04corporate debtor: IBC only if threshold/default and no pre-existing dispute
- 05government civil suit: section 80 CPC two months, urgent-relief exception
माँग नोटिस क्या है और कब भेजें?
माँग नोटिस एक औपचारिक लिखित सूचना है जिसके ज़रिए आप किसी से बकाया भुगतान या किसी दायित्व की पूर्ति की माँग करते हैं। यह अक्सर अदालत जाने से पहले का कदम होता है, जो आपके दावे को दर्ज करता है और सामने वाले को भुगतान/समाधान का अंतिम मौक़ा देता है।
यह उधार, बकाया इनवॉइस, अनुबंध के उल्लंघन या किसी तय राशि की वसूली जैसे मामलों में भेजा जाता है।
- बकाया भुगतान/दायित्व की औपचारिक मांग
- अदालत से पहले का कदम, अंतिम मौक़ा
- उधार, बकाया इनवॉइस, अनुबंध उल्लंघन में उपयोगी
माँग नोटिस को श्रेणियों में समझें
अलग स्थितियों के लिए अलग माँग नोटिस/ढाँचा होता है। इन्हें श्रेणियों में समझना आसान होता है। याद रहे - MSME उपाय तभी मिलता है जब आपूर्तिकर्ता MSMED Act के तहत पात्र/पंजीकृत हो और तथ्य फिट हों।
- वसूली: सामान्य मांग/वसूली नोटिस
- चेक बाउंस: धारा 138 नोटिस
- अनुबंध उल्लंघन: breach-of-contract नोटिस
- MSME: MSMED Act (पात्रता/पंजीकरण के अधीन)
- कंपनी का विवाद-रहित बकाया: IBC धारा 8
- सरकार के ख़िलाफ़: धारा 80 CPC
MSME भुगतान और 45 दिन का नियम
MSMED relief qualifying micro or small supplier को मिलता है। Appointed day, acceptance/deemed acceptance और written agreement के संदर्भ में payment period 45 days से अधिक नहीं हो सकता; हर entity जिसे सामान्य भाषा में MSME कहा जाए, automatically eligible नहीं।
- 45-day ceiling acceptance/deemed-acceptance framework के भीतर
- बिना लिखित अनुबंध: 15 दिन
- देरी पर बैंक दर का 3 गुना मासिक चक्रवृद्धि ब्याज + MSME Samadhaan
IBC धारा 8 और कंपनी से वसूली
IBC ordinary debt-recovery forum नहीं। Operational creditor को threshold (currently ₹1 crore), default, proper section 8 notice और no pre-existing dispute जैसी conditions satisfy करनी होती हैं; 'undisputed debt' अकेला test नहीं।
- IBC = दिवाला प्रक्रिया (सामान्य वसूली साधन नहीं)
- सही तभी जब बकाया विवाद-रहित हो
- section 8 notice (10 days) → section 9; ₹1 crore threshold + no pre-existing dispute
एक अच्छे माँग नोटिस में क्या होना चाहिए?
एक प्रभावी माँग नोटिस साफ़, तथ्यपूर्ण और तारीख़ों सहित होना चाहिए। इसमें बकाया का स्पष्ट विवरण, उसका आधार (अनुबंध/इनवॉइस/चेक), माँगी गई राशि, भुगतान के लिए उचित समय-सीमा, और न मानने पर आगे की कानूनी कार्रवाई का संकेत होना चाहिए।
- बकाया का स्पष्ट विवरण और आधार
- माँगी गई राशि और उचित समय-सीमा
- न मानने पर कानूनी कार्रवाई का संकेत
- रजिस्टर्ड डाक से भेजें और प्रमाण रखें
धारा 80 CPC - सरकार के ख़िलाफ़ नोटिस
Section 80 CPC generally requires two months' prior notice before suit against Government/public officer. Urgent or immediate relief में court leave के साथ section 80(2) route हो सकता है।
- सरकार के ख़िलाफ़ दीवानी मुकदमे से पहले अक्सर ज़रूरी
- सरकार को समाधान का मौक़ा देता है
- ख़ास समय-सीमा और औपचारिकताएँ - वकील से तैयार करवाएं
नोटिस के बाद के संभावित कदम
Route selection: cheque dishonour → section 138; eligible micro/small supplier → MSMED; corporate insolvency conditions → IBC; Government claim → section 80; otherwise contract/civil recovery. Generic notice को हर route पर copy न करें।
- भुगतान/समझौता/विवाद/कोई जवाब नहीं - संभव प्रतिक्रियाएँ
- समाधान न हो तो मामले अनुसार आगे का रास्ता
- वसूली मुकदमा, धारा 138, Samadhaan या IBC
माँग नोटिस में आम गलतियाँ
कुछ आम गलतियाँ माँग नोटिस को कमज़ोर कर देती हैं। इनसे बचना ज़रूरी है ताकि आपका नोटिस और आगे का दावा मज़बूत रहे।
- ग़लत राशि या अस्पष्ट विवरण लिखना
- ग़लत प्रकार का नोटिस चुनना (जैसे बिना पात्रता MSME/IBC)
- ग़लत पते पर या बिना प्रमाण भेजना
- उचित समय-सीमा न देना
- सबूत/रिकॉर्ड संभालकर न रखना
वसूली की समय-सीमा (Limitation Act)
पैसे की वसूली में समय-सीमा का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। परिसीमा अधिनियम (Limitation Act), 1963 के अनुसार आम तौर पर पैसे की वसूली का मुकदमा कारण उत्पन्न होने (जैसे इनवॉइस की देय तिथि) से 3 साल के भीतर दायर करना होता है। इस अवधि के बाद दावा अक्सर समय-बाधित (time-barred) हो जाता है।
इसलिए बकाया लंबा न खींचें - समय रहते माँग नोटिस भेजें और ज़रूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करें।
- पैसे की वसूली का मुकदमा आम तौर पर 3 साल में (Limitation Act)
- देरी पर दावा समय-बाधित हो सकता है
- समय रहते नोटिस और कार्रवाई करें
Mukhya baatein
Key takeaways
- — माँग नोटिस बकाया भुगतान/दायित्व की औपचारिक लिखित माँग है।
- — अलग स्थितियों के लिए अलग नोटिस - धारा 138, MSME, IBC, धारा 80 CPC।
- — MSME उपाय आपूर्तिकर्ता की MSMED-पात्रता पर निर्भर करता है।
- — IBC में threshold और no pre-existing dispute सहित admission conditions जाँचें।
- — अच्छा नोटिस साफ़, तथ्यपूर्ण और रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया हो।
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ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। केंद्रीय कानून के साथ राज्य के स्टांप, पंजीकरण, किराया, प्रक्रिया और स्थानीय नियम अलग हो सकते हैं। अंतिम कानूनी/तथ्य समीक्षा: 1 जुलाई 2026। प्रकाशन से पहले संबंधित राज्य और वर्तमान अधिसूचना की दोबारा जाँच करें। कानूनी समीक्षा के लिए नामित अधिवक्ता का नाम/बार विवरण CMS में जोड़ें। आधिकारिक स्रोत: https://www.indiacode.nic.in/show-data?actid=AC_CEN_46_77_00002_200627_1517807324919&orderno=15§ionId=9897§ionno=15 | https://ibbi.gov.in/uploads/legalframwork/48bf32150f5d6b30477b74f652964edc.pdf | https://www.indiacode.nic.in/show-data?actid=AC_CEN_3_20_00051_190805_1523340333624&orderno=84§ionId=33417§ionno=80। संपर्क: support@inamdarlegal.com | WhatsApp +91 9106469665।

