Turant jawab · Quick answer
अचल संपत्ति का दान धारा 123 के अनुसार पंजीकृत लिखत से होना चाहिए, जिस पर दाता या उसकी ओर से हस्ताक्षर हों और कम-से-कम दो गवाहों का सत्यापन हो। प्राप्तकर्ता की स्वीकृति दाता के जीवनकाल और उसकी क्षमता रहते होनी चाहिए; प्राप्तकर्ता का हस्ताक्षर उपयोगी प्रमाण है, पर हर मामले में स्वीकृति का एकमात्र वैधानिक तरीका नहीं। आयकर धारा 56(2)(x) में बिना प्रतिफल मिली अचल संपत्ति के लिए सामान्यतः ₹50,000 से अधिक स्टांप-ड्यूटी मूल्य देखा जाता है, रिश्तेदार आदि अपवादों के अधीन। रजिस्ट्रार की उपस्थिति/दस्तावेज़ प्रक्रिया राज्य-विशिष्ट है।
अपनी संपत्ति किसी अपने को बिना पैसे लिए देना चाहते हैं - जैसे पिता का बेटी को मकान देना? इसके लिए सही कानूनी रास्ता दान विलेख (Gift Deed) है। संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 122 के अनुसार दान वह अंतरण है जो स्वेच्छा से और बिना किसी प्रतिफल (पैसे) के किया जाता है, और जिसे लेने वाला स्वीकार करता है। इस गाइड में हम आसान हिंदी में समझेंगे कि दान विलेख कैसे बनता है, उसका पंजीकरण कैसे होता है, स्टांप शुल्क व टैक्स के नियम क्या हैं, और क्या दान वापस लिया जा सकता है। इस लेख में “दान विलेख कैसे बनाएँ” का व्यावहारिक और कानूनी उत्तर दिया गया है।
Ek nazar mein · At a glance
- 01दान = बिना पैसे (प्रतिफल) के संपत्ति का अंतरण (धारा 122)
- 02अचल संपत्ति के दान विलेख का पंजीकरण अनिवार्य (धारा 17)
- 03लेने वाले द्वारा स्वीकार किया जाना ज़रूरी
- 04रिश्तेदारों को दान पर स्टांप शुल्क छूट राज्य-दर-राज्य अलग
- 05वैध दान आम तौर पर मनमर्ज़ी से वापस नहीं लिया जा सकता (धारा 126)
दान विलेख क्या है और कैसे बनता है?
दान विलेख वह दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए दाता बिना प्रतिफल संपत्ति देता है। धारा 122 के तहत स्वैच्छिक अंतरण और प्राप्तकर्ता की स्वीकृति आवश्यक है; स्वीकृति दाता के जीवनकाल और उसके सक्षम रहते होनी चाहिए।
अचल संपत्ति के लिए धारा 123 पंजीकृत लिखत, दाता/उसकी ओर से हस्ताक्षर और कम-से-कम दो गवाहों से attestation माँगती है। राज्य के अनुसार stamp duty और registration procedure अलग हो सकती है।
- दाता और प्राप्तकर्ता के पूरे नाम, पते और संबंध
- संपत्ति का स्पष्ट विवरण और सीमाएँ
- यह स्पष्ट उल्लेख कि अंतरण बिना किसी प्रतिफल के है
- दाता के जीवनकाल में स्वीकृति; प्राप्तकर्ता का हस्ताक्षर उपयोगी प्रमाण, पर एकमात्र वैधानिक तरीका नहीं
- उचित स्टांप शुल्क और पंजीकरण
क्या दान विलेख वापस लिया जा सकता है? (धारा 126)
एक आम सवाल - क्या दान वापस लिया जा सकता है? आम तौर पर, एक बार दान विलेख वैध रूप से बन जाए और प्राप्तकर्ता उसे स्वीकार कर ले, तो उसे अपनी मर्ज़ी से वापस नहीं लिया जा सकता। संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 126 के अनुसार दान केवल कुछ सीमित परिस्थितियों में ही रद्द हो सकता है - जैसे जब दाता और प्राप्तकर्ता ने पहले से तय किया हो कि किसी निर्दिष्ट घटना पर दान रद्द होगा (जो दाता की इच्छा पर निर्भर न हो), या उन्हीं आधारों पर जिन पर कोई अनुबंध रद्द हो सकता है (जैसे धोखाधड़ी या अनुचित दबाव)।
ऐसा दान जिसे पूरी तरह दाता की मर्ज़ी पर 'कभी भी वापस' लिया जा सके, वैध नहीं माना जाता। इसलिए दान करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लें।
- वैध और स्वीकृत दान मनमर्ज़ी से वापस नहीं होता
- धारा 126: केवल सीमित परिस्थितियों में रद्द
- मनमर्ज़ी से वापस लेने योग्य दान वैध नहीं माना जाता
दान विलेख, वसीयत और विक्रय विलेख में अंतर
संपत्ति देने के तीन आम रास्ते हैं, पर तीनों अलग हैं। सही रास्ता आपके मक़सद पर निर्भर करता है - अभी देना है या बाद में, पैसे के बदले या बिना पैसे के।
- दान विलेख: अभी, बिना पैसे के, पंजीकरण व (जहाँ लागू) स्टांप शुल्क
- वसीयत: सिर्फ़ दाता की मृत्यु के बाद असर, जीते-जी कोई अंतरण नहीं
- विक्रय विलेख: पैसे (प्रतिफल) के बदले मालिकाना हक़ का अंतरण
स्टांप शुल्क और टैक्स - राज्य और रिश्ता मायने रखते हैं
स्टांप रियायत राज्य और रिश्ते पर निर्भर है। आयकर धारा 56(2)(x) में बिना प्रतिफल मिली अचल संपत्ति के लिए सामान्यतः ₹50,000 से अधिक stamp-duty value देखी जाती है, निर्दिष्ट रिश्तेदार और अन्य वैधानिक अपवादों के अधीन; इसे केवल कुल 'दान मूल्य' की सामान्य सीमा की तरह न लिखें।
- स्टांप शुल्क छूट राज्य-दर-राज्य अलग - सामान्य नहीं
- टैक्स दाता-प्राप्तकर्ता के रिश्ते पर निर्भर
- अचल संपत्ति: सामान्यतः stamp-duty value ₹50,000 से अधिक होने पर धारा 56(2)(x), अपवादों के अधीन
दान विलेख का पंजीकरण - प्रक्रिया और दस्तावेज़
पंजीकरण की प्रक्रिया राज्य-विशिष्ट है। दाता/प्राप्तकर्ता स्वयं या अनुमत प्रतिनिधि के माध्यम से स्थानीय नियमों के अनुसार उपस्थित हो सकते हैं; दो attesting witnesses की वैधानिक आवश्यकता दस्तावेज़ पर है, जबकि कार्यालय में उनकी उपस्थिति/पहचान प्रक्रिया स्थानीय नियम से तय होती है।
ज़रूरी दस्तावेज़ों में आम तौर पर संपत्ति के मूल दस्तावेज़, दाता-प्राप्तकर्ता के पहचान/पते के प्रमाण, फ़ोटो और (जहाँ लागू हो) रिश्ते का प्रमाण शामिल होते हैं। पंजीकरण के बाद प्राप्तकर्ता को नामांतरण (mutation) भी करवा लेना चाहिए।
- स्थानीय प्रक्रिया के अनुसार पक्ष/प्रतिनिधि और गवाह/पहचान दस्तावेज़
- संपत्ति के मूल दस्तावेज़ और पहचान प्रमाण ज़रूरी
- पंजीकरण के बाद नामांतरण (mutation) ज़रूर कराएँ
शर्तों वाला दान और नाबालिग को दान
कुछ मामलों में दान किसी शर्त के साथ दिया जाता है - पर ध्यान रहे, ऐसी शर्त वैध होनी चाहिए और दान को पूरी तरह दाता की इच्छा पर निर्भर नहीं बनाना चाहिए, वरना दान अमान्य हो सकता है। नाबालिग के पक्ष में दान किया जा सकता है, पर उसकी ओर से स्वीकृति उसका कानूनी अभिभावक देता है।
इसलिए शर्तों वाला या विशेष परिस्थिति का दान करते समय वकील से सलाह लेना समझदारी है, ताकि दस्तावेज़ कानूनी रूप से मज़बूत रहे।
- शर्त वैध हो और पूरी तरह दाता की इच्छा पर निर्भर न हो
- नाबालिग को दान संभव - स्वीकृति अभिभावक देता है
- विशेष मामलों में वकील से सलाह लें
दान को चुनौती कब दी जा सकती है?
हर दान पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता; कुछ हालात में उसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। आम आधार हैं - दान धोखाधड़ी या ग़लत जानकारी देकर लिया गया हो, अनुचित दबाव या ज़बरदस्ती से कराया गया हो, दाता मानसिक रूप से निर्णय लेने में सक्षम न रहा हो, या प्राप्तकर्ता ने दान को विधिवत स्वीकार ही न किया हो।
इसीलिए दान विलेख बनाते समय दाता की स्वतंत्र सहमति, स्पष्ट भाषा और सही पंजीकरण बहुत ज़रूरी हैं, ताकि आगे उसे चुनौती देना मुश्किल हो।
- धोखाधड़ी, ग़लत जानकारी या दबाव से दान
- दाता का निर्णय लेने में अक्षम होना
- प्राप्तकर्ता द्वारा दान स्वीकार न किया जाना
दान विलेख बनाम वसीयत - कौन-सा कब चुनें?
अगर आप संपत्ति अभी, अपने जीवनकाल में ही किसी को सौंपना चाहते हैं, तो दान विलेख सही है - पर यह आम तौर पर वापस नहीं लिया जा सकता। अगर आप चाहते हैं कि संपत्ति आपकी मृत्यु के बाद ही किसी को मिले और आप जीते-जी उस पर नियंत्रण रखें, तो वसीयत बेहतर विकल्प है, जिसे आप बाद में बदल भी सकते हैं।
दोनों के अपने कर, स्टांप और प्रक्रिया से जुड़े पहलू होते हैं, इसलिए बड़ी संपत्ति के मामले में वकील से सलाह लेकर निर्णय लें।
- अभी देना है (वापसी नहीं) → दान विलेख
- मृत्यु के बाद, नियंत्रण के साथ → वसीयत
- बड़ी संपत्ति में वकील से सलाह लें
Mukhya baatein
Key takeaways
- — अचल संपत्ति के दान में धारा 123 की registered instrument, donor signature और दो-witness attestation की शर्त लागू होती है।
- — अचल संपत्ति के दान विलेख का पंजीकरण अनिवार्य है (धारा 17)।
- — वैध और स्वीकृत दान आम तौर पर मनमर्ज़ी से वापस नहीं लिया जा सकता (धारा 126)।
- — tax में stamp-duty value, रिश्ता और धारा 56(2)(x) के अपवाद जाँचें।
- — दान, वसीयत और विक्रय विलेख तीनों अलग - मक़सद के अनुसार चुनें।
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ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। केंद्रीय कानून के साथ राज्य के स्टांप, पंजीकरण, किराया, प्रक्रिया और स्थानीय नियम अलग हो सकते हैं। अंतिम कानूनी/तथ्य समीक्षा: 1 जुलाई 2026। प्रकाशन से पहले संबंधित राज्य और वर्तमान अधिसूचना की दोबारा जाँच करें। कानूनी समीक्षा के लिए नामित अधिवक्ता का नाम/बार विवरण CMS में जोड़ें। आधिकारिक स्रोत: https://www.indiacode.nic.in/show-data?actid=AC_CEN_3_20_00042_188204_1523272233671&orderno=132 | https://www.incometaxindia.gov.in/w/section-56-64। संपर्क: support@inamdarlegal.com | WhatsApp +91 9106469665।

